त्रिलोक न्यूज़ मध्य प्रदेश सहायक प्रमुख प्रवीण कुमार दुबे 8839125553

27 अगस्त, यानी कल गणेश चतुर्थी है। इस दिन, चित्रा नक्षत्र, बुधवार और भाद्रपद महीने की चतुर्थी तिथि से शुभ संयोग बन रहा है। गणेश पुराण में बताया गया है कि ऐसे ही संयोग में देवी पार्वती ने दोपहर के समय गणपति की मूर्ति बनाई थी, जिसमें भगवान शिव ने प्राण डाले थे। इस खास दिन पर गणपति की स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त रहेंगे।
भादौ महीने की इस गणेश चतुर्थी पर गणपति को सिद्धि विनायक रूप में पूजने का विधान है। इस रूप की पूजा भगवान विष्णु ने की थी और ये नाम भी दिया।
गणेश जी के सिद्धि विनायक रूप की पूजा हर मांगलिक काम से पहले होती है। माना जाता है गणेश जी का ये रूप सुख और समृद्धि देने वाला होता है। इनकी पूजा से हर काम में सफलता मिलती है। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक कहते हैं।
सिद्धि विनायक रूप: लाल रंग, बैठे गणेश और हाथ में रुद्राक्ष की माला

सिद्धि विनायक रूप की मूर्ति लाल रंग की होती है। ये बैठे हुए गणेश होते हैं। मूर्ति के सिर पर मुकुट और गले में हार होता है। दायां दांत टूटा और बायां पूरा होता है। नाग की जनेऊ पहनी होती है। एक हाथ आशीर्वाद देते हुए, दूसरे हाथ में मोदक और रुद्राक्ष की माला रहती है। तीसरे हाथ में अंकुश (हथियार) रहता है। चौथे में पाश होता है। दायां पैर मुड़ा हुआ और बायां नीचे की तरफ निकला हुआ होता है।












